Search
  • Sonali Kumkar

माझा होशील ना , पेज no 6

Updated: Aug 28

वैभव सोबत मि जशी जशी बोलत होती , तशी तशी माझ मन मि हलक करत होती , क्यों कि मुझ मेरा आसमान मिल चुका था , जो मुझ बेखूबी , बेखुदी से उड़ने दे रहा था ।


वोह मेरा दिल रखता था , खुद का दिल निकालके , खुद के जज्बातो को छुपाना आसान बात नही होती , पर वोह मेरे जैसा था , अपने गम दूर कर मुझे खुश रखने के लिए गूंज उठता था ,

बातो बातो , मैं मैन उसको बोला कि तेरा दिल बहोत साफ हैं उसकी बाते दिल मे अजीब सी , हलचल पैदा करती थी ।

दिन ब दिन शाम ढल रही थी , वैसे मैं उसमे ढल जा रही थी पर , मुझे वो महसूस नही होता था ,

उसने मेरे लिए , first time में short dress भेजा था ,


मुझे लेने की इच्छा नही थी , फिर भी दिल उसको मना नही कर सकता था ..

अदा ये उसकी कातिल थी




7 views

Recent Posts

See All

माझा होशील ना।

बहोत दिनों के बाद ये site मैन खोल दी , इतने दिनों तक लिखने का मन नही करता था । क्या लिखू , और क्या कहु उसके बारे में , दिल हट रहा था उसके ऊपर से मेरा , । मुझे उसको ऊपर प्यार नही हो रहा था , क्यों कि व

माझा होशील ना । page no 5

अनेक दिवस जात होती , काही दिवसात मला दादा चा mail येत होता । त्यातून मला , वैभव बद्दल काही गोस्ट माहित पडल्या , त्याचा स्वभाव मला आवडला होता , त्याच बोलन , मि आता थोड विसरत चालली होती , माझ past .. नव

माझा होशील ना । पान क्रमाक ४

मि नन्तर बाजुच्या घरी जाऊन बसले , मनाला आराम भेटल्या कारणाने पन , तिथेहि तेच । परत घरी आली , त्याचा phone वर miss call alert पडलेला , मि लगेच call केला। । त्याला sorry म्हटले , मला वाटल हा माझ्यावर रा

NEVER MISS A THING

  • Instagram
  • Twitter
I'D LOVE TO HEAR FROM YOU

EMAIL 

FOR ANY SUGGESTION

Copyright © 2020 |.All Rights Reserved C | Best Viewed on internet explorer 9+, Firefox, Chrome |